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ऐतिहासिक नगरी गांव का आदर्श ग्राम योजना में चयन 

aadarsh gaanv nagri chittorgarh

चित्तौडग़ढ़। राजस्थान के चित्तौडगढ़़ जिले का ऐतिहासिक नगरी गांव का स्थानीय सांसद चंद्रप्रकाश जोशी ने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में चयन किया है।इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण नगरी गांव का सांसद जोशी ने पर्यटन की दृष्टि से प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में चयन किया है इस गांव का विकास होने से यहां आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी और गांव के लोगों को पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे । जिला मुख्यालय से पंद्रह किलोमीटर दूर नगरी ग्राम पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व शिवि जनपद की राजधानी था और शिवि जनपद को आधुनिक चित्तौडगढ़़, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा जो मेवाड प्रदेश के नाम से जाना जाता हैं। यह 16 महाजनपदों में एक महत्वपूर्ण महाजनपद था यह नगर बेड़च नदी के पूर्वी तट पर बसा हुआ हैं जो मूल रूप से मध्यमिका् कहलाता था । यह अपभ्रंश होते-होते मध्यमिका नगरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ बाद में और अपभ्रंश होने से आजकल नगरी के नाम से प्रसिद्ध हैं। पूर्ववर्ती मौर्य शासनकाल में यहॉं संगमरमर से बहुत निर्माण हुआ जिसमें हाथीबाड़ा व दीवड़ नामक इमारते बहुत प्रसिद्ध हैं, चूकि इस संगमरमर की रचना में मुगल सम्राट अकबर ने हाथी बांधे थे इसलिए यह स्थान हाथीबाड़ा कहलाया और संगमरमर के बने दीवड़ जो एक प्रकार की चतुरर्थ मीनार हैं इसके उपर मुगल सम्राट अकबर ने मुगलकाल में बहुत बड़ा दीपक रोशनी के लिए जलाया था इसलिए इसको अकबर का दीवड़ या अकबर की मीनार भी कहा जाता हैं। जबकि इन दोनो की रचना सम्राट अकबर से बहुत पूर्व मौर्य काल में हुई यह स्थान आधुनिक मेवाड़ का सबसे प्राचीन स्थान हैं और मेवाड़ की यह प्रथम राजधानी भी रहा था उसके बाद में मेवाड़ की कई राजधानियॉं बनी जिनमें आहड़, नागदा, चित्तौडगढ़़, कुंभलगढ़, गोगुन्दा, चावण्ड व उदयपुर के नाम प्रसिद्ध नगरी के अन्दर सभी मौर्य कालीन रचनाये संगमरमर के पत्थर से बनी हुई थी, धीरे-धीरे उनके टूट जाने से इन संगमरमर के पत्थरों का उपयोग आस-पास के कुए-बावडिय़ों में भी किये जाने लगा। इनमें घोसुण्डी गांव की बावड़ी बहुत प्रसिद्ध हैं जो संगमरमर के पत्थरो से निर्मित हैं। यह सभी स्मारक केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।

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